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Tasveer Aur Frame | A short story of life | Moral Stories Hindi

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Hindi Kavita | Written By:-prem_ki_pakhi (Neha Vats) #writers

  दिवाली पर हर साल आने वाली नयी लक्ष्मी-गणेश जी की मूर्ति ले लेती है पुरानी मूर्ति की जगह और पुरानी मूर्तियाँ रख उठती हैं तुलसी के चौरे पर या पीपल के चबूतरों पर, जो विसर्जन की प्रतीक्षा में क्षण-प्रतिक्षण क्षीण होती रहती हैं। प्रेयसियाँ जिनका स्थान दे दिया जाता है किसी और को और वे ठीक इन्हीं मूर्तियों की तरह रख उठती हैं किसी अनजान के आँगन के चौरों पर जो जीवन भर कर्तव्य निर्वाहन के बीच, धीरे-धीरे क्षीण होती जाती हैं। कभी ना पूरी होने वाली एक प्रतीक्षा मन के ताखों में रखी किसी छोटी ढिभरी की तरह जलती रहती है। Written By:- prem_ki_pakhi (Neha Vats) Follow Us On Instagram:- NEHA VATS

Written by @snehal_a_wele | Hindi Kavita | Poetry | Youtube/Alag Sunau.

  खुद की मोहब्बत जताने के खातिर क्या सच में उस माली के बगीचे के गुलाबो की कुर्बानी देना जरूरी है?? दरअसल बात जताने में और नीभाने में उतना ही फरक है जीतना की ये बात समझने में, की मोहब्बत गर जताने से अच्छी वो कीसीने निभाई जाये तो बेहतर । ~स्नेहल

किसी किताब को यूँ ही ख़त्म कर देना-आकांक्षा श्रीवास्तव | HINDI KAVITA

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  किसी किताब को यूँ ही ख़त्म कर देना, बहुत असहज करता है मुझे, यह जानते हुए कि आज इसका अन्त है, जानते हुए कि कुछ ही पन्ने हैं , आज ही पढ़ लिए जाएंगे, . मैं रोक लेती हूँ स्वयं को, उस आख़िरी पन्ने तक पहुँचने से, किताब बंद करके रख देती हूँ किनारे, यह सोचकर कि अभी तो अन्त नहीं, अभी उन बादलों को घुमड़ने देना चाहिए, जो उस आख़िरी पन्ने पर पहुँचते ही बरस जाएंगे, कि अभी इस समय बारिश का होना या न होना, मैं निर्धारित कर सकती हूँ, . अभी उन बचे पन्नों को बासी होने से बचा सकती हूँ, बचा सकती हूँ उन्हें उस दर्द से, जो वे सहते हैं मोड़े जाने के समय, बचा सकती हूँ उन्हें उन निशानों से, जो उन पर जबरन लगा दिए जाते हैं, . यह जानते हुए कि मेरा उन्हें बचाना, कोई उपकार नहीं, न ही है इसमें मेरी कोई दयालुता, . क्योंकि वह आख़िरी पन्ना , मेरी ही उँगलियों तले दबकर दम तोड़ देगा और किताब रख दी जाएगी, एक लम्बे समयान्तराल के लिए, पुन: खुलने या न खुलने की अनिश्चितता के साथ। ~आकांक्षा श्रीवास्तव

Bhagat Singh-1907 – 23 March 1931

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Bhagat Singh     1907  – 23 March 1931) was an Indian   socialist revolutionary   whose two acts of dramatic violence against the British in India and execution at age 23 made him a folk hero of the   Indian independence movement . In December 1928, Bhagat Singh and an associate, Shivaram Rajguru, fatally shot a 21-year-old British police officer, John Saunders, in Lahore, British India, mistaking Saunders, who was still on probation, for the British police superintendent, James Scott, whom they had intended to assassinate. They believed Scott was responsible for the death of a popular Indian nationalist leader Lala Lajpat Rai as a result of having ordered a lathi charge in which Rai was injured, and, two weeks thereafter, died of a heart attack. As he exited a police station on a motorcycle, Saunders was felled by a single bullet fired from across the street by Rajguru, a marksman. Lying injured on the ground, he was then shot up close several times by Singh, the postmortem rep

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