Anjani vastvikta:--Prerana Upadhyayp

 Anjani vastvikta

=बड़ी धुंधली सी होती जा रही है ज़िंदगी आजकल,
शायद गोधुलि बेला की शाम जैसे..... ???

अब क्या ही कहूं....
जरा नजरिया बदल के देखू तो,,
वही शाम अपने आप में ही बहोत खुबसुरत लगती है...!!!

अपने आप में ही खुश,,
अपने आप में ही गुम सूम.....
कहीं खोई खोई सी..
बहोत ही शांत,,,,

कभी कभी तो ऐसा लगता है,
मानो,
किसी का सदियों से राह तक रही हो.....

या फिर.....!!!
क्या कहुँ,,
उसके मन में चल रही हलचल,
और ,
दिल में उठ रहे तुफान को तो नही सून सकती ना मैं,,
और शायद शांत भी ना करा पाऊं....

समुंदर सी गहराई है ना, उसके अनकहे अल्फ़ाजों में...
शायद उसके दर्द को ना महसूस कर पाऊं...!!

किसे मालूम,
शायद,
वो शाम भी उस धुंधलेपन के हटने का इंतजार कर रही हो....
और अपनी धड़कनो को थामें हुये .....

बहोत ही खामोशी से,
शायद,
आज खुद में ही धल जाना चाहती हो.......!!!

शायद अब ये धुंध हटे,,
शायद अब इस नयी जिंदगी में रोशनी आये!!!!! 🙂

BY Prerana Upadhyayp

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