"एक बरसात"

 "एक बरसात"

एक बरसात तो एसी होगी जब हम साथ भीगेंगे
यूं ही तेज हवाएं चलेंगी और बादल गरजेंगे
वह टिप टिप बूंदों की आवाज झुमके की घुंघरू के साथ बजेंगे
और वह तेज हवाओं से गिरते फूल हमारे जिस्म पर सजाएंगे
वह मिट्टी की सोंधी खुशबू रोम रोम में समाएगी
भीगे तन में दो जिस्म एक जान होंगे
और मौसम के साथ कहीं ना कहीं आप भी बेईमान होंगे
और जब मैं बिजली की गड़गड़ाहट से डरकर आपके सीने से लग जाऊंगी
तब शायद आप भी अपनी मूछों पर देते शान होंगे
वो हसीन रात भी क्या कमाल की होगी
जो एक दूसरे की बाहों में बीतेगी
ज्यादा खुश ना होइए जनाब
हर बार की तरह बाजी हमारी ही जीतेगी
वह जब ठंडी हवा तन को छूकर जाएगी
जायज है आपकी बाहें हमें देंगी गर्माहट
भले ही हम कहीं भी खो जाएं
आपका पता बता ही देंगी आपकी आहट
अभी सुनहरे पल में शर्माना भी तो लाजमी है
ना जाने फिर कब यह पल मिले
और चाय की चुस्की भी तो उस पैरों पर गिरती बूंदों के साथ जरूरी है
ना जाने फिर कब यह महफिल सजे!

By ISITA SRIVASTAVA

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