गुफ़्तगू:-

  गुफ़्तगू

अच्छा नही लगता तुझ से झगड़ा कर के,
नम आँखों से तेरे दिल का जायजा कर के

मैं क्यों लिखूं उसपे पे मेरी क्या लगती है
हर दफा चली जाती मुझसे किनारा कर के

मैं आया हूँ उसके दयार बे-मकसद नही
फ़िज़ाओं ने बुलाया इल्तिजा कर के

गुमां में सुनाए थे अपने आशिक़ी के किस्से
लौट आए वो भी मोहब्बत का ख़सारा कर के

बदल दिया मैंने भी अपना तौर ज़िन्दगी का
दिल से उतार दिया है उसे अपना खुदा कर के

तुझे जाना है तो दफा हो अभी के अभी,
मत सोचना बुलाऊँगा तुझे इशारा कर के

By Aayush Snigdha Paul (कातिब)

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