वह निरक्षर हैं:-हीमांगी

 वह निरक्षर हैं

हां वह निरक्षर हैं,
पगली अपना कर्म ही धर्म बताती है।
तमाचो के निशान और हाथो के छाले
बहुत खूब छिपाती है।
रोज़ाना सेहर को जगा रात्रि को सुला तब कहीं आराम फरमाती है।
मिल रही गालियां और मार ही होनी
समझ स्वयं को समझाती है।
"हां वह निरक्षर हैं,तभी पति के ऑफ़िस
कलिग्स के समक्ष अपनी जिम्मेदारियां
बखूबी से निभा चाकर का दर्ज़ा पाती है।
बिछौने पर उसकी हवस मिटा माशूक
से सीधे अंपढ़ गवार कहलाती है।
"हां वह निरक्षर हैं, तभी बच्चा जनने का
सामान बना दी जाती है।
हर कदम पर सावित्री बन तुम्हे सत्यवान बनाती है।
बावजूद इसके लाज़ लज्जा जैसे संस्कार ढो वह भारतीय नारी का सम्मान हासिल कर दिखाती है।

By हीमांगी

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