मैं तुम्हारे करीब:-समीक्षा जैन // Hindi Kavita #writers

 मैं तुम्हारे करीब

मैं तुम्हारे करीब
धीरे धीरे बढ़ रही हूं
जैसे चाँद बढ़ता है
अमावस से पूनम की ओर।
आगे बढ़ते हुए कदमों के साथ,
मैं भूलती जा रही हूं
जब मैं तुम्हें पूरा पा लूँगी,
उस पूरे चाँद वाली
पूनम की रात की तरह।
उसके बाद धीरे धीरे
मैं तुम्हें खोती चली जाऊँगी
आगामी अमावस की सूनी रात
होगी विरह की अंधेरी रात ।
परन्तु पुनः चाँद आयेगा,
और बढ़ते बढ़ते
फिर अमावस में खो जाएगा।
विरह और मिलन का यह
क्रम भी इसी तरह
चलता रहेगा अनवरत।
और मैं तुम्हें
खोकर भी
पाती रहूंगी हर बार।

By समीक्षा जैन

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