कैसे सम्भलेगा अपना प्यार:-नीरव प्रशांत

 कैसे सम्भलेगा अपना प्यार?


हैं अनंत इच्छाएं मेरी बहुत मेरी आशाएं हैं ,
पर जीवन का मार्ग कठिन है भूली हुई दिशाएं हैं !
होना है मशहूर मुझे तेरा व्यापारी बनने में ,
तुझ पर कविता और शब्दों का कारोबारी बनने में!
मेरी सांसो की पूंजी छोटी, बहुत बड़ा है कारोबार ,
तुम कैसे साथ निभा पाओगी
कैसे सम्भलेगा अपना प्यार?
🌼
जन्मों की ख्वाहिश होती जब कोई अपना लगता है ,
फिर भी उसको पाना क्यों जीवन भर सपना लगता है !
गहराई है प्यार में अपने ,पर मांझी है कोई नहीं ,
कश्ती है बस जज्बातों की तूफानों पर जोर नहीं!
प्रेम भरे हैं नाविक दोनों ,पर ना पास कोई पतवार,
तुम कैसे साथ निभा पाओगी?
कैसे सम्भलेगा अपना प्यार!!
🌼
सुना है हमने लेकिन ये, चलने वाले तो चलते हैं ,
हो कितना भी दीप कुप्त ,पर परवाने तो जलते हैं !
मंजिल होती ऊंची जितनी,उतना त्याग चाहती है !
करके पथ का बंजारा,फिर भी कुछ मांग चाहती है !
नहीं छोड़ती पास में कुछ भी,
बाकी अपना कहने को ,
शेष किंतु कुछ बच जाए तो,वह भी भाग चाहती है!
🌼
कैसे तुम इक क्षीण पथिक की,
जीवन राही बन पाओगी?
भरे दर्द से एक कलम की,कैसे स्याही बन पाओगी?
तुम खुश रहना दूर ही मुझसे,
मेरा क्या मैं हूं बेगार,तुम कैसे साथ निभा पाओगी,कैसे संभभलेगा अपना प्यार?

By नीरव प्रशांत

FOLLOW ON INSTAGRAM:-NEERAV PRASHANT

Comments

Free Now