देश की मीडिया:-दीपक चौरसिया

 देश की मीडिया

कुत्ते भी अब भौंक हो गए फेल मीडिया के आगे,
इनके शोध सबूतों से डर विकिपीडिया भी भागे।

चार चर्चितों को बैठाकर रोज बहस में लड़वाते,
सत्ता की कठपुतली है बस सत्ता के ही गुण गाते।

मुद्दा एक मिला नहीं की पीछे उसके पड़ जाते,
तिल का ताड़ बनाते हैं और तीन का तेरह कर जाते।

चोला काले को सफेद गोरे को काला पहनाते,
पल में झूठे को सच्चा सच्चे को झूठा बतलाते।

नेता व अभिनेता के, जूतों का नंबर उन्हें पता,
आम जनों की ना हैं सुनते, जैसे उनसे हुई खता।

शूल चुभे मशहूरों को जो माइक लेकर वे भागे,
युवा किसान की बात नहीं जो लटक रोज देह त्यागे।

आओ हम इस मूक पशु से प्रश्नों का उत्तर मांगे,
मर गई है मीडिया अब बारी है जनता जागे।

By दीपक चौरसिया

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