मां के हृदय विचार:-सत्यम मिश्रा

 मां के हृदय विचार

सुखद रहे मन विफल ना होए
जब भी लाल मेरा, मेरे गोद में सोए
नटकठ है वो करे नित लीलाएं
चोट लगे तो सम्मुख आ रोए

हे कृपा करू, जग भगवाना
बालक मन को सही दिशा दिखाना
कहीं ऐसा ना हो कर बैर जग से
बालक हृदय में असत्य संजोए
सुखद रहे मन विफल ना होए
जब भी लाल मेरा, मेरे गोद में सोए

नन्हे कदम में बंधे है घुघरू
कर रहे है चंचलता शुरू
भाए मेरे मन को ये चंचलता
कहीं ये पराए जग में ना खोए
सुखद रहे मन विफल ना होए
जब भी लाल मेरा, मेरे गोद में सोए

मैं ममता प्रतिमा माँ कहलाऊं
लाल को अपने गुण से सजाऊं
बालक हृदय कोमल पुष्प के भाँति
कहीं समाज निर्दयता से कठोर ना होए
सुखद रहे मन विफल ना होए
जब भी लाल मेरा, मेरे गोद में सो

By सत्यम मिश्रा

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