विधा-कविता 🌿:-By Swati Mishra

 विधा-कविता 🌿

हम भी जीते ज़िन्दगी,
हम भी जिंदा होते,
तन्हाई का गम ना सहते,
तुम यूँ ना गये होते,
..
जीते दिन में हम रंगरेज़,
यूँ बेरंग ना हम होते,
रातों को तारे ना गिनकर,
तेरी बाहों में सोते,
काश तुम......
..
घर मेरा टूटा था हमदम,
मगर तुम बेघर ना होते,
तेरे साथ नशेमन बसकर,
नये सपने सँजोते,
काश !!तुम.........
..
सफर हमारा था लम्बा,
अगर साथी तुम होते,
छूटता ना दुनियाँ से साथ मेरा,
तुम्हें हादसे में ना हम खोते,
काश!! तुम...........

By Swati Mishra

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