वो मुलाक़ातें:-Diya Bisht

 वो मुलाक़ातें

सब कुछ कहाँ कह पाते हैं
काफ़ी बातें तो भूल ही जाते हैं
आपको देखने के बाद हम
कहा हम रह जाते हैं

तुमसे मिल्ने की वो खुशी
जिस्के लिये हम पूरा दिन तड्पते है
शाम को कुछ पलों की
मुलाक़ातों से उसे हासिल कर लेते है

और उन हसीन लमहों के बाद
दूर जाने का गम और बड़ जाता है
जो फ़िर अगले दिन शामको
तुमसे मिल्के ही खतम हो पाता है

उन मुलाक़ातों मे शायद कोइ नशा है
जिस्की लत मे मानो डूब ही गया ये मन है

By Diya Bisht

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