मेरी मुस्कान:-Khushi Patil

 मेरी मुस्कान

मेरी मुस्कान 😊
इक पहेली सी
कभी उलझी तो
कभी सुलझी सी
उन बादलों के पिछे छिपे उस चांद में समां है इक दाग सा
पर दिल तो सिर्फ उस चांद के लिए ही मछलता है
_उस चांद सी है मेरी मुस्कान🌛
कभी वो हमसे छिपे तो कभी हम उससे छिपे
पर रहती तो सदा हमारे साथ , हमारे पास ही है
_उस परछाई सी है मेरी मुस्कान 👥
वो इक बुंद जो सुखे पत्ते पे तहरते तहरते कुछ उसमें समां सी जाती है
__उस बुंद सी है मेरी मुस्कान💧
इक सवाल जिसके जवाब में हो लाखों सवाल
_उस इक सवाल सी है मेरी मुस्कान ❔
राह भटकते को राह मिले पर ना मिले मंज़िल कोई
_उस मंज़िल सी है मेरी मुस्कान❎
और बताऊ भी तो और क्या मैं बताऊं
ओ अल्फाज जो जज्बात बनकर बह से गये है
_उन अल्फाजों सी है मेरी मुस्कान
बस इक पहेली सी है
मेरी मुस्कान 🔏
इक अनसुलझी पहेली ही है
मेरी मुस्कान🔐 

By Khushi patil

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