🌸 "मैं भूख हूँ" 🌸:-Manshi Dikshit // Hindi Kavita #writers

 🌸 मैं भूख हूँ 🌸

मैं भूख हूँ,मैं भूख हूँ।।
मैं वही भूख जो छोटू से कच्ची उम्र में चाय बनवाती हूँ,
मैं वही भूख जो गुड़ियाँ को बड़ी गाड़ियों के पीछे भगवाती हूँ,
मैं वही भूख जो अम्मा को चावल का पानी पिलावाती हूँ,
मैं वही भूख जो राजू को हर रोज़ दर दर भटकाती हूँ,
मैं वही भूख जो बाबा को घंटों ऑफिस में बितवाती हूँ,
मैं वही भूख जो कुत्तों से हरी घास चबवाती हूँ,
मैं वही भूख जो चिड़ियाँ को अल सुबह जगाती हूँ,
मैं वही भूख जो इन सबकी छाती पर लोट जाती हूँ।



मगर मैं सिर्फ़ जठर में नही रहती,
मैं वो भूख हूँ जो लोगों के मन मस्तिष्क में फिरती हूँ,
मैं वो भूख हूँ जो लोगों के दिल भी चंचल करती हूँ।

मैं रिश्वत बन अफसरों की टेबल के नीचे उछलती हूँ,
मैं हवस बन दरिन्दों की मासूमों की ज़िंदगी छिनती हूँ,
मैं लालच बन ज़मींदारों का किसानों को फंदे से लटकवाती हूँ,
मैं वकीलों से झूठ बुलवा निर्दोषों को सूली चढ़वाती हूँ,
और,
मैं वही भूख हूँ जो चंद पैसों की ख़ातिर अपनी जवान बेटी को कोठे पर बिकवाती हूँ।।
मैं भूख हूँ, मैं भूख हूँ।।

By Manshi Dikshit

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