Mayri kiya galti thi \ kavita

 Mayri kiya galti thi


मै गलत नहीं था पर, वो कहती है तुम गलत हो,खुद से ज्यादा महोब्बत उससे करता था,वो कहती है तुम गलत हो..

गलती थी कि शुरूआत दोस्ती से हुई... चंद दिनों मे ये दोस्ती
महोब्बत मे तापदील हो गई.. मालूम ना चला....

आप आप कहते कहते, कब तू और तुम पे आ गए मालूम ना चला...
एसे मे मेरी क्या गलती थी...बताओ क्या गलती थी..
बात करते करते मालूम ना चलता की कब सुबह हो जाया करती...और फिर ये बोल बोल के कि चलो अब सो जाते है... कुछ घंटे और बीता दिया करती थी...
"इस मे मेरी क्या गलती थी"

वो मुझे आपनी हर चीज़ सौंप चुकी थी.....वो मेरे सामने एक खुली किताब बन चुकी थी....
"इस मे मेरी क्या गलती थी"

कुछ ऐसा हुआ की... उसके सपने हमारे बन चुके थे....ख्वाब उसने देखे और मेहनत हम कर रहे थे...खुश वो थी और तकलीफ हम सह रहे थे....
"क्या ये मेरी गलती थी???"

तुम थे तो इस दिल के हालत कुछ इस तारह थीे..की कोई देखे तुम्हे तो क्यों गुस्सा बहोत आता था...और कोई तुमसे हँस कर गुफतगू कर ले तो ना जाने क्यों दिल भर सा जाता था....."इस मे मेरी क्या गलती थी"

अब माहौल कुछ ऐसा है....ज़िन्दगी मे कुछ कशमकश चल रही है..और दिल और दिमाग़ मे सवालों का एक काफिला कह रहा है ............... तेरी क्या गलती थी ....और मेरी क्या गलती है...


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