वो जी रही है:-nandita sarkar

 वो जी रही है


उसके स्तनों में जन्म ले रहा था
एक गहरा गड्ढा
जिसने ममत्व को निचोड़ फेंका
और भर दिया था उसमें विष और मवाद
लेकिन वो जी रही है

उसके स्तन करते थे
तुम्हें आकर्षित
जब तुम देखते थे उसे
ललचायी नज़रों से
जब भीड़ में तुम अचानक
छू जाते थे उसके उभारों को
वो समेट लेती थी खुद को
वो रहती थी बेचैन
और आँखों में आँसू भर
कोसती थी खुद के
गलत शरीर, गलत उम्र, गलत त्वचा
और गलत लिंग को

आज तुम्हारी आत्मा भयभीत हो जाती है
उसे ललचायी नज़रों से देखने पर
तुम्हारी आँखों में होता है
प्रश्नवाचक चिन्ह

लेकिन वो जी रही है
अपने स्तनों से मुक्त होकर
अब उसका सीना सपाट है
उसके स्तन ने छोड़ दिया है
उसके शरीर पर एक गहरा निशान
वो फिर भी जी रही है
अब वो तुम्हें आकर्षित नहीं करती
तुम फेर लेते हो अपनी नज़रें कुंठित होकर
परन्तु वो कर चुकी है
काफ़ी पहले ही तुम्हारा तिरस्कार
वो अब भी जी रही है
क्योंकि
गलत शरीर, गलत उम्र, गलत त्वचा
और गलत लिंग से बढ़कर है
जीवन का निरंतर चलते रहना।

By nandita_sarkarr 

FOLLOW ON INSTAGRAM:-

टिप्पणियां

Click On Beloww for RS.444

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

India Rejects LIC IPO LIC Strike

World Water Day 22, March. #waterday #worldwaterday #water

Scam 1992: The Harshad Mehta Story// Indian Story