सीलन:-Sajida Hussain

 सीलन

हमारी ज़िंदगी में आये लोगों की गिनती करना,
बहुत ही ज़्यादा कठिन होता है।
कुछ आकर ठहर जाते हैं,
तो कुछ के लिए हम सिर्फ़ एक पड़ाव होते हैं।
जहाँ वो कुछ पल आराम करते हैं,
दिल बहलाते हैं,
और फिर चले जाते हैं।
जो ठहरते है वो भी ,
कभी सहारा बनते है,
तो कभी एक खट्टी-मीठी याद।
कभी कीमती सन्दूक में सजते हैं,
तो कभी हिडेन चैट्स में छुपाये जाते हैं।
कभी जिंदगी गुलाब सी खूबसूरत बनाते हैं,
तो कभी हमें दीमक बन चाट जाते हैं।
तुम हर जग़ह हर वक़्त थे,
तुम मेरी मंज़िल, मेरा सफ़र थे
तुम इन सब से अलग थे,
तुम मेरी ज़िंदगी में सीलन- से थे।
जो मेरे दिल को अकेलेपन की तपिश में
कभी ठंडक पहुंचाते,
तो कभी मेरे दिल की दीवारों में
फैलकर दरार बन जाते
वो ठंडक खत्म हुई,
दरारे भी भर चुकीं,
पर तुम सीलन बन
अब भी मौजूद हो मेरी आँखों में।
.By Sajida Hussain

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