पथिक:-Vineet Kumar Shakya

 पथिक

ए! पथिक तू चलता जा,
ना डगर को डर बना,
तू मंजिलों से मिलता जा,
जो भी तेरी ख्वाहिशें हैं,
तुझको मिलें; कर ख़ुदा से ये दुआ,
फूल भी खुद ब खुद बिछ जाएँगे तेरी राहों में,
जंगलों को रणभूमि समझ; पेड़ों की तू सेना बना।
ए! पथिक तू चलता जा।
ए! पथिक तू चलता जा।
By Vineet Kumar Shakya

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