Ek Kahani Kinner Ki Jubani By Ishika Agrawal || किन्नर की जुबानी सुनिये उन की || एक किन्नर की कहानी... मैं भी कुछ ... || Hindi Kavita #writers



Ek Kahani Kinner Ki Jubani

हम समाज का वो हिस्सा हैं

जिसे समाज ने कभी अपना माना ही नहीं 

क्यूंकि अगर तुम हमे समाज का हिस्सा मानते हो तो तुम्हे ये भी मानना होगा की इस दुनिया में पुरुष और स्त्री के सिवा भी एक लिंग है जो हम किन्नर है

हम अगर समाज का हिस्सा हैं भी तो वो हिस्सा हैं जिसे तुम लोग गाड़ियों के शीशे खोल के चोट लगा देखते तो हो लेकिन मर रहे हों तो भी अस्पताल नही ले जाते 

तुम्हारे बच्चे अगर हमारी तालिया सुन कर मुस्कुरा दे तो डाट कर घर के अंदर भेज देते हो  

हमारी परछाई से भी तुम्हारी खुशियों की रौनक खत्म होने लगती है

हर वक्त ताना देते हो कब तक मांग के खाओगे कुछ काम कर लो और अगर तुम्हारे ही दरवाजे काम मांगने जाए तो जानवरो से भी बुरा सुलूक कर भागा देते हो

हम समाज का वो हिस्सा है जिसके अधिकार के लिए कभी कोई आवाज नहीं उठाता 

जिसका शोषण तुम्हे बस एक नाटक और झूठ ही लगता है

हमे पता है तुम्हे हमारे होने ना होने से कोई फर्क नही पड़ता

लेकिन कभी गौर से देखोगे तो तुम्हे इल्म होगा हमारे ना होने का 

जिसे तुम जानते तो थे लेकिन अपना माना नही...!!

By Ishika Agrawal

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