प्रेम की चौखट पर खड़ी स्त्री By Apurwa Srivastava || पुल पर औरत - कविता || Woman (महिला) || Hindi Kavita || #writrers #poetry

प्रेम की चौखट पर खड़ी स्त्री 


 उस चींटी के समान होती है जो लंबी यात्रा कर मंदिर के प्राॅंगण तक पहुँचती है, प्रभु की शरण में खुद को समर्पित करने, किन्तु मनुष्य के तलवे तले आ जाती और चौखट पर ही अपने प्राण दे देती है। ठीक वैसे ही जैसे....

 प्रेम के सरोवर में तैरकर, अपना सब कुछ त्यागकर, अपना शरीर अपने प्रेमी को समर्पित करने, जब स्त्री अपना पहला कदम उठाती है तब परिवार की इज्ज़त और समाज की मर्यादा उसे उस चौखट को ना लाँघने पर मजबूर कर देते है और स्त्री अपना कदम पीछे कर लेती है, किन्तु वह अपना मन और आत्मा सौंप चुकी होती है प्रेमी को और उसका प्रेम अमर हो चुका होता है।

चौखट के पीछे खड़े लोग समझते हैं उस स्त्री को जीवित, किन्तु उन्होंने उस स्त्री को अपने तलवे तले कुचल डाला प्रेम की चौखट पर, जैसे हम चींटियों को कुचल देते हैं किसी धार्मिक स्थल पर।


Writer:-Apurwa Srivastava

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