कुछ गम दिये संसार ने By कान्हा जी || किसी के गम को भुलाना है आज || Babul KI Duayen / बाबुल की दुआएँ लेती जा ...|| कहानी कफ़न | Virtual Hindi ||Hindi Kavita#writers

कुछ गम दिये संसार ने



कुछ गम दिये संसार ने
जगत को मैं पसार रहा
एक खाली थाली में सज़ा 
खुद को निहार रहा

बंद आँखो के कुछ सपने
अपने आप से बाँट रहा
खुली आँखो वाले सपने भी
थोड़े-थोड़े छाँट रहा

मज़ाक बन रहा दोस्ती का
कुछ अपनों के बीच पराये है
दोस्ती के कुछ रिश्ते
सिर्फ दोस्ती के नहीं हमारे ही हमसाय है

किसी ने खूब हँसाया हमें
किसी ने थोड़ा बहुत रुलाया है
गम की चादर बड़ी हो रही
ना जाने कौन सी नींद में घर समाया है

ऐसी कोई बात नहीं मैं जो लिख ना पाऊ
अभी भी थोड़ा सा खुद से ही नाराज़ हुँ
शायद कभी लौट के ना आऊ

ऐसा वैसा ना समझो मुझे
मैं तो दिल में प्रेम लिए
सभी रिश्तों में अपनापन
कुछ अधूरेपन से छाँट लिए

कुछ दोस्त पुराने हो रहे
पर रिश्ता गहरा नहीं हुआ
जो आसपास ना ठहरा है
बस दूर रहकर गहरा हुआ

आज भी एक पुराना गया
कल फिर शायद नया आ जाए
दोस्ती के रिश्तें को
अपने तरीके से निभा जाए

कोई मन भाए तो कोई
मन में खोट लाए
थोड़ा तो इंतज़ार करो
ना जाने कैसे रंग दिखलाए

कहानी बहुत अधूरी है
मैं भी थोड़ा राह से भटक रहा
क्या बताऊ यारों तुम्हें
आज फिर कोई अपना दूर गया

मैं दुःखी नहीं थोड़ा सोच में हुँ
जो रिश्ते गहरे है
उनके होश में हुँ

समझ नहीं आता कभी-कभी 
कि कमी कहाँ रह जाती है
कुछ दोस्त पुराने हो गए
फिर भी रिश्तें की गहराई समझना बाकी है
फिर भी रिश्ते की गहराई समझना बाकी है
__________
अतिरिक्त - 
आजकल बस इतना ही महत्त्व होता है रिश्तों का जिंदगी में, 
क्योंकि कोई समझ ना पाया इसकी गहराई, 
अनमोल में भी मोल होने लगा है, 
शायद यही है आजकल के रिश्तों की सच्चाई। 

By :- कान्हा जी
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