एक न एक दिन By नमिता गुप्ता "मनसी" || एक-न-एक दिन / तरुण - कविता कोश || Ek Din - एक दिन || मैं ने माना एक न इक दिन लौट के तू आ ||Hindi Kavita #writers


 एक न एक दिन


सुदूर.. बचे-खुचे जंगलों में

एक चिड़िया कर रही है प्रार्थना ,


एक न एक दिन..

विज्ञान की किताबें पढ़ते हुए

तुम जरूर महसूस करोगे

कविताओं की कमी ,

.. तब सारे कवि पूर्वज मिलकर

सिखाएंगे विज्ञान की परिभाषाएं !!


एक न एक दिन..

मोबाइल, इंटरनेट..सब रुख कर जाएंगें

जंगलों की ओर ,

कंक्रीट के घरों में फिर उगेगी दूब ,

नीम..पलाश.. गुलमोहर..पीपल..

खड़े दिखेंगे शान से ,

फिर उड़ेगीं तितलियां इतराती हुईं ,

इंद्रधनुष फिर झांकेगा बादलों की ओट से ,

पतंगें फिर उड़ेंगी सातवे आसमानों पर ,

बतियाएंगीं चिड़ियां सारा दिन पेड़ों पर ,

बच्चे फिर खेलेंगे कागज़ की नावों से..


एक न एक दिन..

घोंसले में आएंगीं सभी चिड़ियां फिर से

प्रार्थना करने के लिए !!


By - नमिता गुप्ता "मनसी"

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