संवाद कविता By संगम रघुवंशी || संवाद की कविता || संवाद होना चाहिये - Amar Ujala Kavya || कविता-संवाद || Hiritersndi Kavita #writers





 संवाद कविता 

"सितारे देखे जा रहे हैं, कि नजारे देखे जा रहे हैं 

चाँद निहारा जा रहा है कि चाँदनी को बुलाया जा रहा है "


ये प्रश्न स्नेही दवारा किया जा रहा है। 


"ना कुछ देखा जा रहा है, ना ही  दिखाया जा रहा है 

ना ही निहारा जा रहा है, ना ही बुलाया जा रहा है 

बस आपका इंतज़ार किया जा रहा है। "


उत्तर पीयूष के कण्ठ से बहाया जा रहा है। 


तुम्हारा कहा मान सकती हूँ, 

पर क्या कारण जान सकती हूँ? 


दुविधा में था शिष्य का मन 

सो नेत्र खोज रहे थे गुरु दर्शन। 


दुविधा बताओ, प्रेम की परीक्षा कराओ 

हमारी शक्तियों को दरवाजा दिखाओ। 


प्यार होता है क्या? 

ये प्रश्न बना है सिरदर्द की वजह। 


पहले प्यार करो, फिर प्रश्न करो 

कुछ चीजें समझो मत, बस महसूस करो 

जीवन नहीं है यूपीएससी परीक्षा 

ना अधिक अवलोकन करो, ना आलोचन करो 

उत्साह भरो, रंग भरो 

किताबें छोड़ो, जिंदगी की ओर चलो। 


किताबें छोडूँ, जिंदगी की ओर चलूँ 

नहीं थिरकते मेरे पाँव गान पर भी 

और तुम कहती हो, ढोल पर ताल भरूँ। 


यही तो है जीवन परीक्षा 

और तुम्हारे ईश की इच्छा 

डूब जाओगे या पार हो जाओगे 

अन्यथा किनारे खड़े रह, डर के शिकार हो जाओगे 

मौत के साथ हो जाओगे।  

       

By संगम रघुवंशी

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