नारियल की टहनियों से By धैर्य || प्यारे नारियल || नारियल की खेती || Hindi Kavita #writers




 नारियल की टहनियों से 


 नारियल की टहनियों से 

छनकर आती हवाऐं 

मुझको ज़ब्त करतीं

तुम्हारी घेरेदार बाहें


तुम्हारी प्रतिध्वनि का 

मेरे होंठो पर मद्धम स्पर्श

बिखरे जैसे कोई स्याही

सारे दिल के कैनवास पर 


गहरे समुन्दर के किनारे

अटखेलियाँ करती लहरें 

नयना तुम्हारे बन भँवर

मेरे नयन पुष्प पर ठहरें 


मिलन के चक्रवात ने 

चहुँओर  हमको घेरा

अद्वैत की मधु रात्रि में

 कोई रहा नहीं अकेला


अब भींचकर मुट्ठियाँ

थोड़ी रेत पास रख लूँ

स्वादहीन जीवन में 

प्रेमरस को चख लूँ

By:- धैर्य

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