एक सुहागन- एक विधवा By मानसी || मै सुहागन हूँ || सुहागन मरना चाहती हूँ || सुहागन के लिए महिलाओं ने रखा ||Hindi Kavita#writers





 एक सुहागन- एक विधवा 


ये रीत पुरानी है।


एक सुहागिनी सुख और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है। 

परंतु ,

एक विधवा दुख और अशुभ का प्रतीक मानी जाती है।


एक सुहागन को लाल जोड़ा दिया जाता है।

और,

एक विधवा से लाल जोड़ा छीन लिया जाता है।


एक सुहागन को सभी हक़ दिए जाते है।

और,

एक विधवा से सभी हक़ छीन लिए जाते है।


एक सुहागन के हाथो में  उसके पति के नाम की मेंहदी लगाई जाती है।

और,

एक विधवा के हाथों में बस उसके पति की यादें रह जाती है।


एक सुहागन को सजाया जाता है ।

और,

एक विधवा का सब उतारा जाता है।


एक सुहागन को पति की उम्र कहा जाता है ।

और,

एक विधवा को हजारों दोष दिए जाते है।


एक सुहागन को सिर का ताज समझा जाता है।

और,

एक विधवा को पैर की जूती समझा जाता  है।


एक सुहागन को सुभ घड़ी में बुलाया जाता है।

और,

एक विधवा को असुभ मानकर नकारा जाता है।


 एक सुहागन भी एक स्त्री है ।

एक विधवा भी एक स्त्री है।

परंतु इतना भेद क्यों है इस दुनिया में दोनो के प्रति?


By-मानसी


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