मानवता अभी बाकी है By मयूरी राजेंद्र पाटिल || HL Community news - मानवता अभी बाकी है || मानवता के साथ जुड़ाव की पहल कर || अभी मानव में मानवता जिंदा ...||Hindi Kavita #writers




 मानवता अभी बाकी है


लोगो ने थोडी राहत भरी साँस ली जब पता चला, हमारे देश ने वँक्सीन निकाली है...उसी वक्त हमारे गाँव में...जिनको पुरा ग्यान था वँक्सीन के बारे में कि वो है क्या? उससे हमारे शरीर को क्या लाभ होगा? वो कितनी फायदेमंद रहेगी?उन्होने तो लगवाने का फैसला किया...जिनको पता नही था उन्होने पता किया...उसके बिच में हि अफवाए फैली, कि महिलाएँ पिरेड में वँक्सीन नही ले सकती...आँधी महिलाए उसमें डर हि गई...इस हालात में ज्यादातर गाँव के लोग घबरा गए...ज्यादातर लोगो ने फैसला किया की हम वँक्सीन नही लगवाएगें...

          अब धिरे-धिरे हमारे गाँव में भी वँक्सीन आने लगी, पर पुरे गाँव के हिसाब से बहुत हि कम लोगो ने वँक्सीन लगवाई...

इससे तो लोगो में और Negetivity फैल रही थी, औरतो में बाते होती "मै तो नही लुँगी" फिर दुसरी बोलती "मै भी नही लुँगी", यह सब गाँव के स्कुल के एक टिचर ने देखा... उनको एक बात सुझी,उन्होने दुसरे हि दिन से वह करना शुरु किया...उनको क्या सुझी होगी यह कोई सोच भी नही सकता था,उन्होने कभी वासुदेव का, कभी पुलिस इस्पेक्टर का तो कभी महादेव का रुप धारन किया,गल्ली-गल्ली जाकर वासुदेव जैसा नाच किया,वासुदेव जैसे गले में थेला डाला, घर-घर जाकर बोला "वो ताई... वो मावशी... चला लसीकरण करा ले चला..", ऐसे गाँव कि भाषा में लोगो को समझाया,अपनी थेले में  से बच्चो में मास और सँनिटाईजर भी बाँटे, और कभी-कभी महादेव बनकर डमरु बजाया, लोगो में कहॉ महादेव खुद आए है, आपकी चौखट पर आपको केहने, आँगन में महादेव जैसा नाच भी किया, पुलिस जैसे कपडे पेहेनकर लोगो को समझाया हमारी सुरक्षा में देश के योध्दा कैसे जुटे है? वँक्सीन कितनी सुरक्षीत और कोरोना से लढ़ने में कितनी सक्षम है? यह सब उन्होने नाच-गा कर बताया,लोगो का मनोरंजन भी हुआ और आसानी से बात समझ में भी आ गई...और तो और लोगो के मन का डर भी भाग खड़ा हुआ...फिर क्या अगले कुछ दिनों में तो वँक्सीन के लिए लाईने लगने लगी,लोग ज्यादा और वँक्सीन कम पड़ने लगी....गाँव में लगभग ७० प्रतीशत लोगो ने वँक्सीन

लगवाई.. यह बात देखते-देखते जिल्हा के कलेक्टर से लेकर मिडिया को पता चली, मिडिया ने खुद आकर इस अनोखे तरीके को कवर किया, वो टिचर से मिले...सारे देश को दिखाया,इससे देश में भी वँक्सीन के प्रती कही गलतफेमियाँ दुर हुई...कही लोगो को प्रेरणा मिली  इस कोरोना काल में लोगो की मदत करने की,दुसरो को हौसला देने की...

         यह कहानी सच पर आधारित है...जिस जमाने में दो शब्द प्रेम से बोलने में भी लोग हिचकिचाते है, उस में घर-घर जाकर मनोरंजन करना,नाच-गाना करना ऐसी अनोखी पेहेल देखने को मिलना मेरा और शायद आप सबका सौभाग्य हि होगा...उस टिचर कि में स्टुंडट थी यह बात  मेरे लिए कम फक्र की नही है...याद करते हि मेरा सर गर्व से उचा उठ जाता है...इस कार्य को देखकर न जाने कितने दिलो में मानवता के भाव जागे,कितनो ने अपने अहंकार को त्यागा होगा...कितने परीवार सुरक्षीत हुए होंगे.।


 By: - मयूरी राजेंद्र पाटिल

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