अकेलापन खाता जा रहा है लोगों को By शक्ति बवेजा || अकेलापन बहुत ख़तरनाक है या बेहद || क्या है अकेलापन, लक्षण || अकेलेपन की समस्या से जूझता समाज ||

       



       अकेलापन खाता जा रहा है लोगों  को


         अकेलापन खाता जा रहा है लोगों को,

आजकल हर इंसान परेशान बहुत है।

रिश्ते पानी बनते जा रहे हैं दिन भर दिन,

रिश्तों के नाम पर लोग बेईमान बहुत है।

अक्सर इसलिए भी टूट जाते हैं रिश्ते,

एक जिद्दी, दूजे में स्वाभिमान बहुत है।

तुम गरीब हो तो मैं तुम्हें पहचानता नहीं,

पैसे वालों का पर समाज में सम्मान बहुत है।

पाप बनता जा रहा है आजकल तो बोलना,

सुना है दीवारों के पास भी कान बहुत है।

'शक्ति' लिखता है, क्या होता है लिखने से,

यहाँ हर किसी के पास अब ज्ञान बहुत है।


लेखक :- शक्ति बवेजा


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