लौट रही हैं कविताएं By नमिता गुप्ता ||बहारें लौट आयी हैं / जनार्दन राय ||कोलाहल जीवन का कुछ थमा-थमा सा है ...|| लौटने की कोई जगह नहीं || Hindi Kavita#writers




 लौट रही हैं कविताएं


 लौट रही हैं कविताएं

चिड़ियां ..

चुग रहीं हैं धूप

और

कुछ दानें कविता के ,

देखो..

खेल रहे हैं

हरे जंगल

घोंसलों में उसके !!

चिड़िया को सुनना

कविता का सुनना है ,

और..

कविता का सुनना ,

लौट आना है

चिड़ियाओं का

फिर से 

घोंसलों में !!

देखो, लौट रहीं कविताएं भी

एक-एक कर

पन्नों में !!


By:- नमिता गुप्ता "मनसी"

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