मृगनयनी By विनीत || Mragnayani - मृगनयनी - Amar Ujala Kavya || तुम मृगनयनी / भगवतीचरण वर्मा ...|| वो मृगनयनी शोख हसीना। मोहक रंगों ...|| Hindi Kavita#writers




मृगनयनी

हे! मृगनयनी तुम बतलाओ,

मेरे दिल का चैन बनोगी क्या?,



जिसमें थोड़ी नींद मिले,

काया को ज़रा सुकून मिले, 

सुख की हल्की अनुभूति हो, 

वो शीतल रैन बनोगी क्या? 

हे! मृगनयनी तुम बतलाओ,

मेरे दिल का चैन बनोगी क्या?,



तेरी काया है देवी की मूरत, 

तेरी शशि जैसी सुन्दर सूरत, 

जीवन में मेरे तिमिर चढ़ा, 

मेरे लिए ज्योति बनोगी क्या? 

हे! मृगनयनी तुम बतलाओ,

मेरे दिल का चैन बनोगी क्या?,



मेरी आँखे फड़क रहीं,

धड़कन तेजी से धड़क रहीं,

मैं नेत्रविहीन तेरे प्रेम बिना, 

तुम मेरे नैन बनोगी क्या?

हे! मृगनयनी तुम बतलाओ,

मेरे दिल का चैन बनोगी क्या?,

By :-"विनीत"

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