Phir Se Muskurayenge By अतुल आनंद ||मुश्किल दिन बीत जाएंगे||हम फिर ...Kuch Din Aur || Hindi Kavita#writers


 

                                                             हम फिर से मुस्कुराएंगे

 

 हम फिर से मुस्कुराएंगे
वही खुली हवाओं में
वही ढलती शामों में
वही लहलहाते खेतों में
वही ठंडे झरने में
हम फिर से वापस डूब जायेंगे
हम फिर से मुस्कुराएंगे।

 

बहुत जान गंवाए हमने
कल की हमको खबर नहीं
भरोसा है हमें खुद पर
हम फिर से गलियों में टहलते नजर आएंगे
हां हम फिर से मुस्कुराएंगे।

 


ना मुंह पर कोई बंदिशें होंगी 
ना जीभ को करना पड़ेगा सब्र
ना ही फिर गले मिलने से डरेंगे
ना ही होगा कोई छुआछूत का भय
हम फिर से बेखौफ भागते नजर आएंगे
हां हम फिर से मुस्कुराएंगे।

 


थोड़ी दिन की और बात है
फिर एक नई सुबह होगी
वही लाल रंग की किरणों से फिर
हम खुद ही नैन चुराएंगे 
दौड़ेंगे फिर मंजिलों की ओर निडर 

हां हां हम फिर से मुस्कुराएंगे।

                                                            BY - अतुल आनंद

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