वो थी काली रात By आकाश श्रीवास्तव || वो काली रात || वह काली रात: भाग-1 || वो काली रात || HindiKavita#writers



वो थी काली रात

 छठ गई काली रात अब नया सवेरा आ रहा है ।

जाग ए नवयुवक देख तेरा कल तुझे बुला रहा है।

छोड़ कर निद्रा आलस की तू झांक झरोखों से बाहर,

देख चिड़ियों का झुंड प्रकृति संरक्षण की गुहार लगा रहा है।

उठ आ और आंखें धो अपनी

फिर देख उन आंखों को जो तेरे लिए सपने सजा रहा है।

कर स्नान तू त्याग का हटा दे धूल निराशा,दुख और हताशा की,

जो तुझे मैला बना रहा है।

अब सजा ले खुद पर अपने परिजन, गुरु की आशाओं की वेशभूषा को,

देख तेरा दायित्व तुझे बुला रहा है।

ग्रहण कर ले अब तू भोजन और बना ले संतुलन जरा सा,

देख दान कर जाकर कोई भूखा तुझे बुला रहा है।

उठा तू चाबी अपने स्कूटर की

भर ईंधन सेवा भाव की चल पड़ मंजिल दफ्तर तक देख तेरी मिट्टी तेरा देश तुझे बुला रहा है।

By आकाश श्रीवास्तव

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