कैसे होगी By कुलदीप गौड़ || प्रेम कविता || Hindi Love Poems || Love Poem in Hindi ||Hindi Kavita#writers

कैसे होगी..?


 इस बिगड़ते बचपन की अब, वो शर्माती जवानी कैसे होगी..?

चढ़ती तरुणाई की अब, वो इठलाती मनमानी कैसे होगी..?


हृदय-सागर में अमृत-लहरों की मस्त रवानी कैसे होगी..?

विचारों वाली खुली चादर की, अब खींचातानी कैसे होगी..?


ज़िस्म नोंचने की फ़िराक वालों, कोई मेल रूहानी कैसे होगी..?

रंग बिरंगे इस संसार में, अब कोई प्रेम कहानी कैसे होगी..?


इस फ़िल्मी ज़माने की तो, अब कोई राधा सयानी कैसे होगी..?

लड़कें भी कहाँ रहे कान्हा से, कोई मीरां भी दीवानी कैसे होगी..?


By:- कुलदीप गौड़

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