वादे By Ishika Agrawal || वादा शायरी - रेख़्ता - Rekhta || आदतन तुम ने कर दिये वादे || वादे VAADAY ( PROMISES )||Hindi Kavita#writers




 वादे

 वो नहीं करता वादे चांद-तारे तोड़ने के .....

पर वादा करता है जब भी मेरे पैरों में काटा चुभेगा वो सबसे पहले आएगा निकालने 

जब गर्मी की धूप सताएगी वो सबसे पहले आएगा 

मेरी छांव बनने 

जब ठंडी में ठिठुर रही होऊंगी तो वो सबसे पहले आएगा मुझे बाहों में भर कर गर्माहट देने 

जब दुनिया की भीड़ में खुद को पीछे छूटता महसूस करूंगी तो वो सबसे पहले आएगा मुझे हाथ पकड़ कर दुनिया की भीड़ से आगे निकालने के लिए 

और ये चांद तारे तोड़ने के वादों से कई गुना ज्यादा खूबसूरत है

By - Ishika Agrawal

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