देश प्रेम, वीरों की गाथा By Sejal goswami || 'वीरों की गौरव गाथा हमेशा याद || देश-प्रेम/देश-भक्ति कविताएँ/गीत || देश भक्ति दोहे :- देश प्रेम से ||Hindi Kavita#writers






                       

देश प्रेम, वीरों की गाथा


 आओ सुनाऊँ तुमको मैं एक कहानी।। 

आओ सुनाऊँ तुमको मैं एक कहानी, 

      ढाल की , तलवार की , वीरों के बलिदान की ।। 


माटी जो सोना उगलती हैं ,

सूर्माओ को पैदा करती हैं। 


मिट जानें को तैयार हैं, 

ये वीरों की ललकार है। 


ज्वाला हैं रौद्र रक्त की, 

हुक्कार हैं ये शास्त्र की। 


मिट्टी मे मिल जाएगें, 

दुश्मन का सिर काट के आएँगे। 


ये माटी हैं छत्रपति शिवाजी की, 

चेतक वीर महाराणा प्रताप की। 


इसपे नज़र जब जब कोई लगाएगा, 

पाताल मे उसकाे दबाया जायेगा। 


ग़जनबी सा वो धूल चाटेगा, 

शत्रु जीवन की भीख मांगेगा। 


       आओ सुनाऊँ तुमको मैं एक कहानी, 

      ढाल की , तलवार की , वीरों के बलिदान की । 


घर -घर मे सूरमा पलता है , 

छाती ठोक के भारत माता की जय करता है। 


जय हो - जय हो इस माटी की , 

हर गर्भ से सैनिक का जन्म होता है। 


भगत सिंह का था नारा, 

शेखर ने लगा डाला बल सारा। 


मोहन के व्रत पर चले सभी, 

आज़ादी की ओर बड़े थे तभी। 


पाण्डे ने आरंभ करी क्रांति , 

मोहन राय से मिटी भेद की भ्रांति । 


वीरों की ये माटी हैं, 

केसरी होना हमारी नीति है । 


       आओ सुनाऊँ तुमको मैं एक कहानी, 

       ढाल की , तलवार की , वीरों के बलिदान की ।। 


कारगिल रहा या हो इंडो - चाईना, 

साईचीन या इंडो - पाक का मसला। 


वीरों ने हुक्कारा हैं, 

पर्वत हिला डाल है । 


सैनिक सीमा पे तने रहते है, 

बेफ़िक्र तभी हम सोते है । 


 चटाते है धूल भेड़ियों को , 

कसीदे सिपाहियों के हम पढ़ते है । 


सीधे हैं , सच्चे हैं , काले और गोरे हैं , 

अग्नि हैं रक्त में, भारत माता के लाल है। 

ये लाल ना चुप रहते है , 

भूमि के लिये जीते और मरते हैं।


       आओ सुनाऊँ तुमको मैं एक कहानी, 

      ढाल की , तलवार की , वीरों के बलिदान की  ।।


By - Sejal goswami 

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